Lab Impact

विगत एक दशक मे भोपाल शहर मे वनो / पेडो की कटाई का अध्ययन
( Study of Decadal deforestation/tree cover fall of Bhopal City)
(वर्ष 2009 से 2019 तक)

विगत 10 वर्षो मे राजधानी भोपाल मे वनो और वृक्षों की कटाई से स्थानीय आबोहवा और इसके पर्यावरण पर प्रभाव का अध्ययन करने के लिए जी.सीड (ग्लोबल अर्थ सोसायटी फॉर एनवॉयरॉनमेंटल एनर्जी एण्ड डेवलपमेंट) संस्था की ओर से पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पाण्डेय के नेतृत्व मे विस्तृत अध्ययन, अवलोकन और परिणाम प्राप्त किये गये। इस रिपोर्ट को बनाने के लिए प्रो. टी.वी. रामचन्द्रन की वर्ष 2016 मे प्रकाशित शोधपत्र, गूगल इमेज़नरी, विभिन्न सांख्यकीय विधियों, जमीन तहकीकात एवं अवलोकन की मदद ली गई है। इसके अलावा पिछ्ले 10 वर्षो मे भोपाल शहर पर पडने वाले जनसंख्या दबाव, तापमान, एयर पॉल्यूशन एवं आकस्मिक गतिविधियों का भी अध्ययन किया गया है। सोसायटी के रिसर्च ऑफिसर अभय शर्मा द्वारा बताया गया कि सम्पूर्ण अध्ययन को 15 प्रमुख क्षेत्रो (Point Sources) मे बांटा गया है और इस आधार पर सैम्पल के रुप मे तीन सडको (बीआरटीएस होशंगाबाद रोड, कलियासोत डेम की ओर जाने वाली रोड एवं नार्थ टी.टी. नगर की स्मार्ट रोड) को सैम्पल के रुप मे लिया गया है। हबीबगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नं 1 की ओर से स्टेशन के दोनो ओर की साईट को सैम्पल के रुप मे लिया गया है । न्यू मार्केट इलाके मे गैमन इण्डिया कैम्पस एवं चक्की चौराहे क्षेत्रो को सैम्पल के रुप मे लिया गया है। सैकण्ड स्टॉप स्थित वन विभाग द्वारा निर्मित नव निर्मित शासकीय भवन निर्माण के स्थल, जागरण लेक सिटी यूनिवर्सिटी स्थित वन क्षेत्र, भोपाल एयरपोर्ट के नजदीक स्थित मिल्ट्री हॉस्पिटल एरिया एवं बैरागढ मूर्ति विसर्जन स्थल क्षेत्र को भी सैम्पल के रुप मे लिया गया है। सैम्पल के रुप मे लिये गये उपरोक्त 11 पाईट सोर्सेस की पिछले 10 वर्षो की गूगल इमेजनरी के परिणाम अत्यंत चौकाने वाले हैं। जैसा की संलग्न गूगल इमेजनरी फोटोग्राफ से स्पष्ट है की उपरोक्त 11 प्रमुख क्षेत्रो से ही 345 एकड से अधिक वन क्षेत्र अथवा पेड पूरी तरह समाप्त कर दिये गये है। यदि 1 एकड मे 450 वृक्षो की कल्पना की जाये तो उपरोक्त मात्र 11 प्रमुख क्षेत्रो मे ही लगभग 1 लाख 55 हजार वृक्षों की कटाई के परिणाम सामने आते है। उल्लेखनीय है कि कटने वाले उक्त अधिकांश वृक्ष 50 वर्षो से अधिक आयु के थे । 15 प्रमुख क्षेत्रो मे से बचे हुए 4 प्रमुख क्षेत्र एकांत पार्क, शाहपुरा पहाडी क्षेत्र, बीयू कैम्पस एवं स्वर्ण जयंती पार्क के पेडो / वनो को सैम्पल के रुप मे लिया गया । विगत 10 वर्षो मे एकांत पार्क एवं शाहपुरा पहाडी मे वन / पेडो की स्थिति यथावत बनी हुई है जबकि बी.यू कैम्प्स एवं स्वर्ण जयंती पार्क मे पेडो / वनो की संख्या मे उल्लेखनीय वृद्धि हुई है जैसा की संलग्न फोटो ग्राफ से भी स्पष्ट है । उपरोक्त 15 प्रमुख स्थानो के अलावा भोपाल शहर के सैकडो अन्य स्थानो (Non point sources) से भी अलग – अलग संख्या मे विगत 10 वर्षो मे पेडो / वनो की कटाई हुई है और यह संख्या लगभग 3 लाख 50 हजार पेडो की कटाई की ओर् इंगित करती है इस प्रकार विगत 10 वर्षो मे भोपाल शहर मे 50 वर्ष से अधिक पुराने काटे गये पेडो की संख्या लगभग 5 लाख आती है जो कि अत्यधिक चिंताजनक और निराशाजनक है। टीवीआर फार्मूले को आधार बनाते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है वर्ष 2009 मे भोपाल शहर मे ट्री कवर 35 प्रतिशत था जो कि वर्ष 2019 मे कम होकर मात्र 9 प्रतिशत रह गया । अतः विगत 10 वर्षो मे भोपाल शहर मे लगभग 26 प्रतिशत पेडो / वनो की कटाई की गई और यदि यही ट्रेड चलते रहा तो वर्ष 2025 मे शहर मे ट्री कवर मात्र तीन प्रतिशत रह जायेगा जो कि एक एलार्मिंग स्थिति है। शोध एवं अध्ययन से यह पता चलता है कि भोपाल शहर मे विगत एक दशक मे हुई विशाल वन / पेडो की कटाई के लिए अनियोजित शहरीकरण (Unplanned Urbanization), घटता एफ.ए.आर, बढता पॉपूलेशन लोड (करीब 5 लाख जनसंख्या वृद्दि प्रति दशक), मरते हुए तलाब, यातायात प्रदूषण एवं भूजल मे निरंतर कमी होना है। निःसदेह इस विशाल दुर्दशा के लिए सरकारी संस्थाएँ भोपाल नगर निगम, सीपीए, म.प्र.प्रदूषण नियंत्रण मंडल, वनविभाग एवं राज्य शासन सीधे जिम्मेदार है। उपरोक्त दशकीय वन / पेडो की कटाई के कारण स्थानीय तापमान मे 5-7 डिग्री की बढोतरी का अनुमान है इसी प्रकार स्थानीय इकोलॉजी / जैवविविधता बहुत बुरी तरह चरमरा गई है स्थानीय हवा मे ऑक्सीजन की मात्रा मे भी उल्लेखनीय कमी हुई है जबकि ग्रीन हाउस गैसो की मात्रा मे तेजी से वृद्धि अंक़ित की गई है। उपरोक्त कारणो से ध्वनि प्रदूषण मे भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

Work Impact

 

 

 

भोपाल शहर मे सर्वजनिक स्थानों पर पीने के पानी की स्थिति का अध्ययन 

  1. पर्यावरणविद डॉ. सुभाष सी. पाण्डेय द्वारा आयोजित इस अतिसंवेदनशील एवं महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता का उद्देश्य राजधानी भोपाल स्थित, सार्वजनिक शासकीय प्रतिष्ठानो के द्वारा आम जनता को उपलब्ध कराये जा रहे पेयजल (drinking water) की गुणवत्ता (quality) का खुलासा करना था क्योकि इन सार्वजनिक स्थानो से रोज लाखो लोग पानी पी रहे है जबकि राजधानी भोपाल और मध्यप्रदेश मे पानी से उत्पन्न बीमारियों (water born disease) की संख्या लगातार बढती जा रही है।
  2. इतने बडे और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए लगातार तीन दिनो तक पूरे शहर के विभिन्न स्थानो से कुल 42 सैम्पल इकठठे किये गये जिनमे 28 सैम्पल पानी के, 8 सैम्पल बर्फ के, और 6 सैम्पल पानी के टैकर्स से लिए गये थे। इन सैम्पल्स की “जनता की लैब” मे लगातार 6 दिनो तक विभिन्न रासायनिक परीक्षण कर परिणाम निकाले गये।
  3. पानी के सैम्पल्स भोपाल स्थित समस्त रेलवे स्टेशनो से, सभी बस स्टेशनो से, हमीदिया होस्पिटल, सुल्तानिया जनाना हॉस्पिटल और जे.पी.हॉस्पिटल से, प्रमुख शासकीय महाविद्यालयो, हमीदिया आर्ट्स कॉलेज एवं एम.वी.एम साईस कॉलेज और पाँच नम्बर स्थित हैण्डपम्प से इकठठे किये गये थे।
  4. बर्फ के सैम्पल्स लिलि टॉकिज, भोपाल मेन रेलवे स्टेशन, बैरागढ बस स्टैण्ड एवं सेकण्ड स्टॉप तिराहे से लिए गये थे ।
  5. शहर मे पीने का पानी सप्लाई करने वाले टैकर्स अवतार वॉटर सप्लाई चूना भटटी, यादव वॉटर सप्लायर, सर्वधर्म एवं शीतल दास की बगिया स्थित टैकर से सैम्पल लिए गए थे।
  6. समस्त 42 सैम्पल्स की जाँच करने के लिए तीन प्रमुख पैरामीटर्स लिए गये। बैक्टेरियोलॉजिकल अशुद्धियाँ जाँचने के लिए टोटल कॉलीफार्म की मात्रा निकाली गई। बीआईएस 2012 के अनुसार यह मात्रा 0 MPN / 100 ml होनी चाहिए अर्थात पीने के पानी मे मल मूत्र से उत्पन्न बैक्टेरिया बिल्कुल नही होने चाहिए अन्यथा ऐसा प्रदूषित पानी पीने से गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल बीमारियों के होने की संभावना बहुत अधिक बढ जाती है। पीलिया, अमीबॉयसीस, उल्टी दस्त, गैस्ट्रीक, ब्लड प्रेशर सिरदर्द, किडनी और अनेक जानलेवा पेटजन्य बीमारियाँ, बैक़्टेरियोलॉजिकल प्रदूषित पानी पीने के कारण ही होती है।
  7. सैम्पल्स मे फिजिको केमिकल पैरामीटर्स, पीएच, टीडीएस और डीओ की मात्रा भी निकाली गई जिससे यह ज्ञात हो सके की पेय जल मे अम्लीयता या क्षरीयता घुलित ठोस कणो की मात्र और घुलित ऑक्सीजन की मात्रा कितनी है। बीआईएस 2012 के अनुसार पेयजल मे पीएच की मात्र 6.5 से 8.5 के बीच मे होनी चाहिए जबकि टीडीएस का मान 500 मि.ग्रा / ली. तक की सीमा मे स्वीकार्य है, इसी प्रकार घुलित ऑक्सीजन की मात्रा 6 मि.ग्रा / ली. या अधिक होना आवश्यक है। इन पैरामीटर्स की मात्रा निर्धारित सीमा से कम या अधिक होने पर पेय जल गम्भीर रुप से पेट संबधी, रक्त संबधी एवं त्वचा रोगो के लिए खतरनाक साबित होता है।
  8. पेय जल मे किसी भी हेवी मेटल की मात्रा निर्धारित सीमा से अधिक होने पर वह कैसर जन्य रोगो का कारण बनता है सैम्पल मे आयरन हेवी मेटल की मात्रा 0.3 मि.ग्रा. / ली से अधिक नही होनी चाहिए।
  9. राजधानी के विभिन्न इलाको से लिए गये पानी, बर्फ और वॉटर टैकर्स के विश्लेषण का चार्ट संलग्न है (संलग्न 01)
  10. जनता की लैब मे कराये गये सैम्पल्स की एनालिसिस के प्रमुख परिणाम निम्नानुसार है :

  • i). हबीबगंज रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नम्बर 01 का पानी परीक्षण उपरांत शुद्ध पाया गया।
  • ii). जे.पी हॉस्पीटल, भोपाल मेन रेलवे स्टेशन हमीदिया आर्टस कॉलेज एवं पाँच नम्बर स्थित हैण्डपम्प का पानी साधारण खराब पाया गया जिनके सैम्पल्स मे प्रति 100 मि.ली. मे एमपीएन की संख्या 100 तक प्राप्त हुई ।
  • iii). नादिरा बस स्टैण्ड बोरिंग, हमीदिया हॉस्पिटल बोरिंग, हलालपुर वॉटर टैंक और बैरागढ रेलवे स्टेशन स्थित वॉटर टैक का पानी चिंताजनक स्थिति का प्राप्त हुआ जिसमे एमपीएन की मात्रा 500 प्रति 100 मि.ली प्राप्त हुई।
  • iv). सुल्तानिया जनाना अस्पताल वॉटर टैक, नादिरा बस स्टैण्ड वॉटर टैक, हमीदिया हॉस्पिटल वॉटर टैक और एमवीएम कॉलेज बोरिंग का पानी अत्यधिक प्रदूषित पाये गये जिनमे मल युक्त बैक्टैरिया की मात्रा 1100 प्रति 100 मि.ली से अधिक पाई गई।
  • v). सुल्तानिया जनाना अस्पताल बोरिग एवं भोपाल मेन रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म नम्बर 6 का पेय जल बहुत अधिक प्रदूषित पाये गये जिनमे मल युक्त बैक्टैरिया 2400 गुना से अधिक प्राप्त हुआ।
  • vi). सभी सैम्पल्स मे पीएच, टीडीएस और घुलित ऑक्सीजन की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर प्राप्त हुई किंतु नादिरा बस स्टैण्ड बोरिंग, हलालपुर वॉटर टैक और हमीदिया अस्पताल के बोरिग मे टीडीएस की मात्रा 500 से 1000 के बीच प्राप्त हुई जो कि गम्भीर चिंताजनक स्थिति है
  • vii). भोपाल रेलवे स्टेशन के पास स्थित बर्फ के ठेलो से लिए गये बर्फ के सैम्पल मे टोटल कॉलीफार्म की मात्रा 30 प्राप्त हुई जिसे सामान्य कहा जा सकता है।
  • viii). लिली टॉकीज और सेकण्ड स्टॉप से लिए गये बर्फ के सैम्पल मे टोटल कॉलीफार्म की मात्रा 240 गुना प्राप्त हुई है। जो कि बर्फ की गुणवत्ता पर गम्भीर प्रश्न है।
  • ix). बैरागढ बस स्टैण्ड से लिए गये बर्फ के सैम्पल मे टोटल कॉलीफार्म प्रदूषण की मात्रा 2400 गुना से अधिक पाई गई जो कि अत्यधिक चिंताजनक एवं स्वास्थ्य के लिए गम्भीर चेतावनी है।
  • x). कमला पार्क स्थित शीतलदास की बगिया के वॉटर टैक मे पानी के सैम्पल मे टोटल कॉलीफार्म 04 मिला जो कि सामान्य कहा जा सकता है।
  • xi). शाहपुरा चूना भटटी और सर्वधर्म कॉलोनियों मे चल रहे वॉटर सप्लाई टैकरो मे पेय जल मे 2400 गुना से अधिक मल मूत्र के बैक्टेरिया (टोटल कॉलीफार्म) प्राप्त हुए जो कि अत्यधिक चिंताजनक और स्वास्थ्य्य के लिए गम्भीर चेतावनी है।
  1. डॉ. पाण्डेय ने बताया कि प्राप्त परिणामो को संबधित जिम्मेदार विभागो, संस्थाओ, नगर-निगम एवं पीएचईडी की ओर भेजा जायेगा ताकि इस दिशा मे तत्काल संज्ञान लिया जा सके और आवश्यक उचित कार्यवाही की जाये।
  2. इन परिणामो के आधार पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल भोपाल के समक्ष एक जनहित याचिका भी दायर की जायेगी ताकि लाखो की जन आबादी को शुद्ध पेय जल मुहैया कराने मे मदद मिल सके।
  3. विभन्न स्थानो से लिए गये सैम्पल्स के चुनिंदा फोटोग्राफ संलग्न है।

 

Sample Content-3

सीवेज फार्मिग

उद्देश्य :

जहरीले पानी से उगाई जा रही सब्जियों (sewage farming) के प्रति जनता को जागरुक एवं शिक्षित करना और जिम्मेदार संस्थाओ को जगाना।

उपकरण एवं विधि :

USEPA, Method 6010B (ICP-OES) एवं विभिन्न अंतराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओ मे प्रकाशित शोध पत्रो मे उल्लेखित विधियों का उपयोग कर अंत मे प्रतिष्ठित अंतराष्ट्रीय कम्पनी “हैक” के स्पैक्ट्रोफोटोमीटर की मदद से सब्जियों मे उपस्थित हैवी मेटल की जाँच की गई । सब्जी मंडी एवं खेतो से सब्जियों के सैम्प्ल इकठठे किये गये और उनमे कैडमियम, जिंक, लैड एवं क्रोमियम हैवी मेटल्स की उपस्थिति की जाँच की गई।

प्रोजेक्ट पूर्ण होने मे लगा समय :

आठ वैज्ञानिको की टीम द्वारा 12 दिनो तक लगातार इस प्रोजेक्ट पर काम किया गया जिसके अंतर्गत साईट विजिट, सैम्पल कलेक्शन एवं लैबोरेटरी वर्क शामिल है।

परिणाम :

मंण्डीदीप के पास स्थित कलियासोत और बेतवा नदियों से सिचिंत खेतो मे लिये गये सब्जियों के सभी सैम्पल मे बडी मात्रा मे हेवी मेटल्स मिले है इसमे 7.5 गुना से अधिक कैडमियम 8.5 गुना से अधिक लैड और 1.41 गुन क्रोमियम पाया गया। सब्जियों के सैम्पल मे जिंक निर्धारित अधिकतम सीमा के अंदर प्राप्त हुआ।

भानपुर खंती स्थित पतरा नाले से सिंचित सब्जियों के सैम्पल मे भी लगभग सब्जियों के सभी सैम्पल बडी मात्रा मे हैवी मेटल से प्रदूषित पाये गये। सब्जियो मे 9 गुना तक कैडमियम, 8 गुना तक लैड और लगभग 1.5 गुना तक क्रोमियम प्राप्त हुआ। यहा की सब्जियों मे जिंक भी प्राप्त हुआ है

बिटटन मार्केट सब्जी मंडी से लिये गये सब्जियों के सैम्पल मे भी हैवी मैटल प्राप्त हुए है जिनमे कैडमियम 3 गुना तक और लैड 4 गुना मिला है यहा बेची जा रही सब्जियों मे जिंक और क्रोमियम की मात्रा निर्धारित अधिकतम सीमा के भीतर ही प्राप्त हुई है। यहाँ की पत्तेदार भाजियो मे 6 गुना अधिक मात्र मे लैड प्राप्त हुआ है।

प्रभाव

लगातार जहरीली सब्जियो एवं फलो के सेवन से विभिन्न कैसर जन्य बीमारियो की संभावना बढ जाती है इससे विभिन्न गैस्ट्रो इंटेसटाईनल बीमारियो का खतरा बढ सकता है।

सावधानियाँ

  1. गर्मियो मे पत्तेदार भाजियाँ खाने से बचे।

  2. जहाँ तक हो सके ऑर्गेनिक फल एवं सब्जियों का इस्तमाल करे।

  3. फल और सब्जियाँ उपयोग करने के पूर्व सादे पानी से अवश्य धोए।

  4. फल एवं सब्जियों के लिए वेजिटेबल क्लीनर का उपयोग करे।

  5. कम से कम बाजार से लाई गई फल-सब्जियों को नमक युक्त गरम पानी मे 15 मिनट अवश्य रखे।

  6. सब्जियाँ खरीदते वक्त सावधानियाँ बरते । दुकानदार से यह अवश्य पूछे की सब्जियाँ कहा से लाई गई है।

  7. दाग वाले फल / सब्जियाँ अधिक स्वस्थ्यप्रद एवं बेहतर है।

  8. स्थानीय और मौसमी फल – सब्जियाँ के सेवन पर जोर दे ।

  9. असमान्य चमक, साईज एवं स्वादयुक्त फल सब्जियाँ खाने से बचे।

  10. औद्योगिक क्षेत्रो के नजदीक / सीवेज पॉण्ड के नजदीक बेची जा रही सब्जियाँ खरीदने से बचे।

अगला कदम :

सब्जियों के प्राप्त उपरोक्त परीणामो को एनजीटी भोपाल के समक्ष रखते हुए कोर्ट मे मानहानि याचिका की जायेगी जिससे किसानो को शुद्ध / ट्रीटेड पानी मुहैया हो सके और शुद्ध सब्जियाँ प्राप्त हो सके। एक अन्य याचिका मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग मे दायर कर शुद्ध एवं स्वस्थ्यकर सब्जियाँ उपलब्ध कराने की माँग की जायेगी।

Work Impact

 

Sample Content-2